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Showing posts from October, 2019

خمسة أسرار من خزانة ملابس ملكة انجلترا

وتوضح لنا ريا أن تغطية الإنترنت شحيحة جدا في منطقة التظاهر وتُقطع إحيانا، لذا يلجأ المتظاهرون إلى استخدام شبكة "واي فاي" بديلة (كاسبر) بديلا عن التغطية المقطوعة أو الضعيفة التي تقدمها شركات الهواتف النقالة في المنطقة. ويقول نزار إن المعتصمين نظموا أنفسهم بشكل عفوي في مجاميع تتناوب على الصعود للمبنى في نوبات على امتداد ساعات اليوم كي يظلوا مسيطرين على المبنى ولا يسمحوا باقتحامه. ويحاول الشباب ابتكار وسائل تديم هذا التناوب كما هي الحال مع حالة المتظاهر الذي فضل أن نسميه بالحرف الأول من اسمه (ل) الذي يقول إنه يتناوب مع أخيه في نوبات الاعتصام في المبنى، وقد اضطرا إلى تأجير غرفة في فندق قريب يتناوبان على النوم فيها وجعلاها قاعدة خلفية لتخزين الأودية للمتظاهرين والمعلبات والمواد الغذائية . في كثير من مقاطع الفيديو التي يتداولها بعض الناشطين على وسائل التواصل الاجتماعي للمبنى وساحة التحرير ليلا، يخلد في البال مشهد تلك الأضواء المتقاطعة التي يرسلها المعتصمون في المبنى فيرد عليهم المتظاهرون في الساحة في احتفاء ضوئي ينير ليل بغداد. كشف كتاب لواحدة من أقرب مساعدات الملكة ...

धरती का फ़्रीजर आर्कटिक क्यों सुलग रहा है

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई को लेकर कहा, "बॉम्बे हाई कोर्ट ने फ़ैसला दिया है कि यह जंगल नहीं है." उन्होंने कहा, "जब दिल्ली में पहले मेट्रो स्टेशन बना तो 20-25 पेड़ काटे जाने की ज़रूरत थी. तब भी लोगों ने विरोध किया था, लेकिन काटे गए प्रत्येक पेड़ के बदले पांच पेड़ लगाए गए. दिल्ली में कुल 271 मेट्रो स्टेशन बने, साथ ही जंगल भी बढ़ा और 30 लाख लोगों की पर्यावरण पूरक सार्वजनिक यातायात की व्यवस्था हुई. यही मंत्र है, विकास भी और पर्यावरण की रक्षा भी, दोनों साथ-साथ." इधर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को ख़ुद अपनी सहयोगी शिवसेना से सबसे बड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई के विरोध में उतर आए हैं. 'हम प्रकृति की पूजा करते हैं और प्रकृति ही हमारा ईश्वर है.'....'आदिवासी पूरी तरह से जंगल पर निर्भर हैं.' ये कहना है कि मुंबई की आरे कॉलोनी में र इस इलाके में रहने वाले आदिवासी कार्यकर्ता प्रकाश भोइर ने बीबीसी को बताया, "रात...

जापान के ये पेड़ भविष्य बता सकते हैं

सीआईए वर्ल्ड फ़ैक्टबुक स्टैटिटिक्स के अनुसार ईरान की आठ करोड़ की आबादी में 60 फ़ीसदी लोग 30 साल से कम उम्र के हैं. ईरान में तकनीकी रूप से फ़ेसबुक और ट्विटर प्रतिबंधित है लेकिन ज़्यादातर युवा प्रतिबंध की उपेक्षा कर वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं. वॉशिंगटन बेस्ड फ़्रीडम हाउस 2018 की स्टडी के अनुसार ईरान में 60 फ़ीसदी लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में इस आंदोलन को सोशल मीडिया के ज़रिए काफ़ी फैलाया गया. 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान में महिलाओं पर कई तरह की पाबंदी लगा दी गई थी. लेकिन इस बार सरकार को झुकना पड़ा. आयतोल्लाह रुहोल्लाह ख़ुमैनी के शासन में महिलाओं को बाल ढंकने पर मजबूर किया गया और उनसे तलाक़ फाइल करने का हक़ भी वापस ले लिया गया था. टाइट कपड़े पहने को लेकर भी महिलाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया. शराब और संगीत पर भी पाबंदी लगा दी गई. अब यहां की महिलाएं कह रही हैं कि उन्हें चुनने की आज़ादी दी जाए कि वो इस्लामिक कोड के हिसाब से कपड़े पहनना चाहती हैं या नहीं . 'हम प्रकृति की पूजा करते हैं और शुक्रवार को अदालत का फ़ैसला आते ही प्रदर्शन और ...