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गूगल मैप्स पर आया नया अपडेट, जानें क्या होगा फायदा

गूगल मैप्स में नए अपडेट दिय गए हैं, जिनकी मदद से यूजर लाइव लोकेशन और बस-ट्रेन यात्रा के लिए ETA (आगमन का अनुमानित समय) को शेयर कर पाएंगे। यह पुराने लोकेशन फीचर का अपग्रेड वर्जन है। अपडेट के साथ मिला यह नया फीचर फिलहाल अभी एंड्रॉयड डिवाइस के लिए जारी किया गया है और जल्द ही यह फीचर आईओएस यूजर को भी प्राप्त हो जाएगा। इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए आपको सबसे पहले एंड्रॉयड स्मार्टफोन में मौजूद गूगल मैप्स को गूगल प्लेस्टोर पर जाकर अपडेट करना होगा।
यह जानकारी ना केवल गूगल कॉन्टैक्ट बल्कि थर्ड पार्टी एप   और WhatsApp पर भी शेयर कर सकेंगे। बस और ट्रेन ट्रिप को शेयर करने के लिए सबसे पहले गंतव्य स्थान को सेट करें और फिर ट्रांजिट टैब में जाएं। लिस्ट में उचित रूट के लिए नेविगेशन को एक्टीवेट करें और फिर नीचे दाईं ओर 'शेयर ट्रिप प्रोग्रेस' बटन पर क्लिक करें।रेनो की नई सब 4-मीटर एमपीवी एक झलक टेस्टिंग के दौरान कैमरे में कैद हो गई। भारत में इसे 2019 की शुरुआत में लॉन्च किया जा सकता है।  हालांकि, टेस्टिंग के वक्त कैमरे में कैद हुई कार को अच्छे से ढंका गया था। इसके बाद भी कार के डिजाइन को आसानी से समझा जा सकता है। इसे पहले भी टेस्टिंग के दौरान देखा जा चुका है। इसे रेनो की नई डिजाइन थीम पर तैयार किया गया है। इसकी कीमत पांच से 7.5 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) के बीच हो सकती है। यह रेनो क्विड हैचबैक पर बनी है। रेनो कारों की रेंज में इसे क्विड और डस्टर के बीच पोजिशन किया जाएगा। इसमें रैप अराउंड हैडलैंप्स और टेललैंप्स दिए गए हैं।
 . के मुताबिक, रेनो की नई एमपीवी डैटसन गो प्लस से ज्यादा लंबी होगी। इस वजह से इसकी तीसरी रो में गो प्लस से ज्यादा स्पेस दिया जा सकता है। रेनो क्विड पर बनी एमपीवी को केवल पेट्रोल इंजन में पेश किया जा सकता है। इसमें क्विड वाला 1.0 लीटर या डैटसन गो वाला 1.2 लीटर इंजन दिया जा सकता है। ये दोनों ही इंजन सब 4-मीटर सेगमेंट के लिहाज से सही हैं।
नई एमपीवी के केबिन को ड्यूल-टोन लेआउट में पेश किया जाएगा। डैशबोर्ड पर हल्के बैज कलर के हाइलाइटर देखने को मिलेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस में रेनो डासिया वाला नया मीडिया नव इवोल्यूशन सिस्टम, एंड्रॉयड ऑटो और एपल कारप्ले कनेक्टिविटी के साथ दिया जा सकता है। रेनो क्विड की तरह इस में भी फ्रंट और रियर सीट हैडरेस्ट दिया जा सकता है। 
सभी जानते हैं कि वायु प्रदूषण जीवन के लिए खतरनाक है, लेकिन हाल के एक अध्ययन में पता चला है कि वायु प्रदूषण का जीवन पर पड़ने वाला असर एचआईवी/एड्स होने और सिगरेट से होने वाले नुकसान से भी घातक है। अगर भारत इस संबंध में वैश्विक दिशानिर्देशों के अनुरूप हो जाए तो वहां लोग औसतन 4.3 वर्ष ज्यादा जी सकेंगे।
शिकागो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने नया वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक (एक्यूएलआई) तैयार किया है जिससे पता चलता है कि हवा में मौजूद प्रदूषक प्रति व्यक्ति औसत जीवन प्रत्याशा 1.8 वर्ष तक कम कर देते हैं। एक्यूएलआई के अनुसार यह प्रदूषण विश्व भर में मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए इकलौता सबसे बड़ा खतरा है। जीवन प्रत्याशा पर इसका प्रभाव एचआईवी/ एड्स और टीबी जैसी संक्रामक बीमारी के अलावा सिगरेट पीने और युद्ध के खतरों से भी अधिक खतरनाक है।
वायु प्रदूषण से होता है स्तन कैंसर का खतरा
यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर माइकल ग्रीनस्टोन कहते हैं, आज विश्व भर में लोग ऐसी हवा में सांस ले रहे हैं जो उनके स्वास्थ्य पर बेहद खतरनाक असर डाल सकती है और जिस प्रकार से इन खतरों को दिखाया जाता है वह अपारदर्शी और भ्रमित करने वाला है। वायु प्रदूषण सघनांक प्रदूषण के स्तर को लाल, भूरा, और हरे रंग में दर्शता है। वैश्विक जनसंख्या के करीब 75 प्रतिशत लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां यह प्रदूषण डब्ल्यूएचओ के निशानिर्देश को पार कर गया है। इसके अनुसार भारत इस संबंध में वैश्विक दिशानिर्देशों के अनुरूप हो जाए तो वहां लोग औसतन 4.3 वर्ष ज्यादा जी सकते हैं।

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